अमृतसर:
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोबारा पैरोल दिए जाने के फैसले पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे पक्षपातपूर्ण और दोहरी नीति का उदाहरण बताया है। एडवोकेट धामी का कहना है कि एक तरफ गुरमीत राम रहीम को बार-बार पैरोल और फरलो की सुविधा दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से जेलों में बंद बंदी सिंहों को अपने बीमार परिजनों से मिलने के लिए भी पैरोल नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि सरकार के इस रवैये से कानून और न्याय व्यवस्था में समानता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बंदी सिंहों के मामलों पर भी उठाए सवाल
धामी ने कहा कि कई बंदी सिंह दशकों से देश की अलग-अलग जेलों में बंद हैं। उनके मुताबिक, कुछ कैदी अपनी कानूनी सजा पूरी करने के बावजूद अब तक रिहाई का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से ऐसे मामलों में भी समान दृष्टिकोण अपनाने की मांग की।
सरकार पर लगाया राजनीतिक लाभ का आरोप
SGPC अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकारें राजनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए राम रहीम के मामले में बार-बार नरमी बरत रही हैं। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे व्यक्ति को लगातार पैरोल या फरलो मिलना और दूसरी ओर बंदी सिंहों के मामलों में अलग रवैया अपनाना सरकार की कथित दोहरी नीति को दर्शाता है।
धामी ने सरकार से सवाल किया कि यदि पैरोल के नियम सभी के लिए समान हैं, तो फिर लंबे समय से जेलों में बंद अन्य कैदियों के मामलों में भी उसी तरह का व्यवहार क्यों नहीं किया जाता।
