पंजाब में भीषण गर्मी और बढ़ती मांग के बीच बिजली संकट गहराने की आशंका बन गई है। राज्य के प्राइवेट थर्मल प्लांटों में केवल 3 दिनों का कोयला स्टॉक शेष बचा है। यदि समय रहते कोयले की नई रैक नहीं पहुंची, तो उत्पादन ठप हो सकता है और राज्य भर में लंबे बिजली कट लग सकते हैं।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार के कोयला मंत्रालय ने पंजाब में कोयले की कमी के दावों को खारिज करते हुए कहा कि PSPCL के पास पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराया गया है और असली समस्या कोयले की कमी नहीं, बल्कि प्लांटों का कम प्लांट लोड फैक्टर (PLF) यानी क्षमता से कम उत्पादन है।
पंजाब सरकार बनाम केंद्र: दावों में भारी अंतर
राज्य और केंद्र सरकार के बीच बिजली और कोयला आपूर्ति को लेकर बिल्कुल अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं:
-
पंजाब का दावा (प्राइवेट प्लांटों में संकट): पंजाब में बिजली की दैनिक मांग लगभग 15,900 मेगावाट (MW) तक पहुंच गई है, जबकि राज्य का अपना उत्पादन केवल 4,862 MW है। राज्य को 11,100 MW बिजली बाहरी स्रोतों व केंद्रीय पूल से खरीदनी पड़ रही है। पांचों प्रमुख थर्मल प्लांटों की स्थापित क्षमता 5,680 MW है, लेकिन केवल 3,800 MW ही उत्पादन हो पा रहा है। प्राइवेट प्लांटों में 3 दिन और सरकारी में 8-10 दिन का कोयला बचा है।
-
केंद्र का जवाब (117% स्टॉक और पचवाड़ा खदान से आपूर्ति): कोयला मंत्रालय के अनुसार, PSPCL के सरकारी प्लांटों (लहरा मोहब्बत, गोइंदवाल साहिब और रोपड़) में 4 सितंबर 2026 तक मानक आवश्यकता का 117% कोयला स्टॉक मौजूद था। केंद्र के अनुसार, अगस्त में PSPCL के प्लांटों का औसत PLF मात्र 42% रहा।
-
नाभा पावर का प्रदर्शन: केंद्र ने बताया कि नाभा पावर लिमिटेड (NPL) ने अगस्त में 93% PLF दर्ज किया। पचवाड़ा सेंट्रल कोल माइन से NPL और तलवंडी साबो (TSPL) को 50% तक कोयला इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।
वर्तमान स्थिति: 2 यूनिट बंद, शाम के पीक आवर्स में ग्रिड पर दबाव
राज्य में सौर ऊर्जा से दिन के समय राहत मिलती है, लेकिन सूरज ढलते ही सोलर उत्पादन शून्य हो जाता है। ऐसे में शाम के पीक आवर्स में थर्मल पावर का उत्पादन कम होने से पावर ग्रिड पर दबाव बढ़ जाता है।
वर्तमान में लहरा मोहब्बत की एक यूनिट और रोपड़ थर्मल प्लांट की यूनिट नंबर-6 तकनीकी कारणों से बंद हैं। यदि अगले 3 दिनों के भीतर प्राइवेट प्लांटों को कोयले की नई आपूर्ति प्राप्त नहीं हुई, तो राज्य में बिजली उत्पादन और गिर सकता है।
पंजाब बिजली व कोयला संकट का संक्षिप्त विवरण
| मुख्य पहलू | पंजाब सरकार का पक्ष | केंद्र सरकार (कोयला मंत्रालय) का पक्ष |
| कोयला स्टॉक | प्राइवेट प्लांटों में केवल 3 दिन का स्टॉक बचा | PSPCL प्लांटों में जरूरत का 117% कोयला उपलब्ध |
| उत्पादन समस्या | केंद्र से समय पर कोयले की रैक प्राप्त नहीं हो रही | प्लांटों का कम PLF (42%) कम उत्पादन की मुख्य वजह |
| बिजली मांग व आपूर्ति | मांग 15,900 MW; आंतरिक उत्पादन 4,862 MW | NPL ने 93% PLF पर काम किया, CIL से पर्याप्त आपूर्ति |
| वर्तमान स्थिति | रोपड़ और लहरा मोहब्बत में 2 यूनिट बंद; कटों का खतरा | RCR मोड के तहत लाखों टन कोयले की बुकिंग व ढुलाई |
