कनाडा (मेजर टाइम्स) Canada News: कनाडा के ओंटारियो से सिख समुदाय और प्रवासी भारतीयों को झकझोरने वाला मामला सामने आया है। ओंटारियो स्थित दो प्रसिद्ध गुरुघरों—’सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो’ और ‘नानकसर ठाठ ईशर दरबार ब्रैम्पटन’—की संपत्तियों को गिरवी रखकर लिया गया ₹102 करोड़ (1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर) का भारी-भरकम लोन न चुका पाने के कारण कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में ऋणदाता कंपनियों द्वारा कोर्ट केस दर्ज कराए जाने के बाद जज ने दोनों गुरुद्वारों की संपत्तियों को बेचने और उन पर नया लोन लेने पर सख्त रोक लगा दी है।

15% से बढ़कर 24% हुआ ब्याज; ₹88 करोड़ से अधिक बकाया
अदालत में जमा किए गए दस्तावेजों और ऋणदाता कंपनियों (SSMT मैनेजमेंट इंक और ऑकुलस मॉर्गेज जीपी इंक) की याचिका के अनुसार मामले का ब्योरा इस प्रकार है:
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करोड़ों का लोन और विवाद: अप्रैल-मई 2025 में सिख स्पिरिचुअल सेंटर टोरंटो के लिए 1.5 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग ₹102.6 करोड़) की लोन लिमिट तय की गई थी, जिसमें से 1.2 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग ₹82.1 करोड़) जारी किए जा चुके हैं।
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ब्याज दर में भारी उछाल: शुरुआत में लोन पर 15% सालाना ब्याज तय था, लेकिन समय पर किस्तें न चुकाए जाने के कारण कंपनी ने ब्याज दर बढ़ाकर 24% कर दी। इसके चलते हर महीने का ब्याज लगभग ₹2.5 करोड़ हो गया और कुल बकाया ब्याज बढ़कर 1.3 करोड़ कनाडाई डॉलर (लगभग ₹88.9 करोड़) के पार पहुँच गया।
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उद्देश्य अस्पष्ट: इतना भारी कर्ज दोनों गुरुद्वारों की प्रबंध समितियों (मैनेजमेंट) ने क्यों लिया, इसे लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है और इसकी जांच जारी है।
पूर्व लिबरल सांसद राजविंदर ग्रेवाल और उनकी लॉ फर्म शक के दायरे में
मामले में पंजाबी मूल के पूर्व कनाडाई लिबरल सांसद व वकील राजविंदर ग्रेवाल तथा उनकी लॉ फर्म ‘RSG लॉ प्रोफेशनल कॉरपोरेशन’ की भूमिका गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है:
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सिक्योरिटी न दर्ज कराने का आरोप: लोनदाता का दावा है कि आरएसजी लॉ को ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति पर कानूनी ‘सेकेंड चार्ज’ (सिक्योरिटी) दर्ज कराने की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
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संदिग्ध वित्तीय लेन-देन: लॉ सोसाइटी रिकॉर्ड्स के अनुसार अप्रैल महीने में आरएसजी लॉ के ट्रस्ट अकाउंट से दोनों गुरुद्वारों को लाखों डॉलर ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा ‘बैंक ऑफ नोवा स्कॉटिया’ से जुड़े चेक धोखाधड़ी मामले का संदिग्ध फंड भी गुरुद्वारे के खाते में ट्रांसफर होने की बात सामने आई है।
ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट का आदेश; संपत्तियों के हस्तांतरण पर रोक
मामले की गंभीरता को देखते हुए ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ऑफ जस्टिस के जज फ्रेडरिक एल. मायर्स ने 11 सितंबर को आदेश जारी कर जनवरी में होने वाली अगली सुनवाई तक ब्रैम्पटन गुरुद्वारे की संपत्ति की बिक्री या उस पर नया लोन लेने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
कानूनी विवाद जारी: हालांकि पूर्व सांसद ग्रेवाल के वकील साइमन बीबर ने दावा किया है कि मामला सुलझा लिया गया है, लेकिन ऋणदाता कंपनी की वकील मारिया नाइमार्क ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि कोई समझौता नहीं हुआ है और कानूनी लड़ाई जारी है।
