फर्जी कॉल सेंटरों के जरिए अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतर्राष्ट्रीय सिंडिकेट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा चलाए गए इस व्यापक सर्च ऑपरेशन के तहत पटियाला, मोहाली, चंडीगढ़ और पुणे समेत कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस दौरान 3 लाइव कॉल सेंटर पकड़े गए हैं, जहां 220 से अधिक कर्मचारी फर्जी कॉलिंग में जुटे हुए थे।

चंडीगढ़ में बनाया था कंट्रोल सेंटर, पुणे और पटियाला में चल रहे थे कॉल सेंटर
ED की जांच में अवैध कॉल सेंटर नेटवर्क के संचालन और मास्टरमाइंड्स के काम करने के तरीके का खुलासा हुआ है:
-
पटियाला में देर रात रेड: मंगलवार देर रात ED की टीमों ने पटियाला के फेज़-2 स्थित कमर्शियल मार्केट के शोरूम नंबर 8, 9 और 10 में अचानक दबिश दी। यहां 2 लाइव कॉल सेंटर चलते पाए गए।
-
चंडीगढ़ से रिमोट कंट्रोल: चंडीगढ़ स्थित एक रिहायशी मकान को पटियाला के फर्जी कॉल सेंटरों के संचालन और नियंत्रण (Control Centre) के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था।
-
मोहाली और पुणे में भी रेड: मोहाली के सेक्टर-82 में एक प्रॉपर्टी डीलर और कारोबारी के आवास पर भी तलाशी ली गई। वहीं, पुणे स्थित कॉल सेंटर से भी अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने की बात सामने आई है।
हवाला और फॉरेक्स नेटवर्क: 66 मोबाइल और 13 लैपटॉप जब्त
जांच एजेंसी ने मौके से भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण और अवैध वित्तीय लेनदेन के साक्ष्य बरामद किए हैं:
-
डिजिटल जब्ती: छापेमारी के दौरान 66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, कंप्यूटर, नेटवर्किंग उपकरण और हेडसेट जब्त किए गए हैं।
-
डॉलर-रुपया एक्सचेंज का खेल: चंडीगढ़ में रेड के दौरान एक व्यक्ति अमेरिकी डॉलर (USD) को भारतीय रुपये (INR) में बदलने के अवैध काम में लगा हुआ मिला।
-
VoIP और डायलर डेटा: बरामद लैपटॉप और मोबाइल में अमेरिकी नागरिकों का डेटाबेस, कॉलिंग स्क्रिप्ट्स, VoIP सिस्टम, डायलर और ठगी की रकम के बंटवारे का डेटा मिला है।
अमेरिकी नागरिकों को कैसे बनाते थे शिकार?
-
फर्जी बहाने और साइबर ठगी: कॉल सेंटरों की आड़ में अमेरिकी नागरिकों को फर्जी तकनीकी सहायता, टैक्स पेनाल्टी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर अलग-अलग बहानों से उनसे पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे।
-
वित्तीय कड़ियों की जांच: ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कर्मचारियों का सरगना कौन है, अमेरिकी नागरिकों का डेटा कहाँ से लीक हुआ और ठगी की रकम किन हवाला या क्रिप्टो चैनलों के माध्यम से भारत पहुंची।
