Rice Price Hike: देश में आम उपभोक्ताओं की थाली पर महंगाई का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। चीनी, प्याज, सब्जियों और खाद्य तेलों के बाद अब चावल की कीमतों में तेजी का रुख देखा जा रहा है। मानसून की बेरुखी (कम बारिश) के कारण खरीफ फसल के उत्पादन पर संशय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती वैश्विक मांग के चलते भारतीय चावल के निर्यात दाम पिछले एक साल के उच्चतम स्तर (1-Year High) पर पहुंच गए हैं।

भारतीय चावल की कीमतों में उछाल
रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय और निर्यात बाजार में भारतीय चावल के भाव तेज हुए हैं:
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उसना चावल (Parboiled Rice): भारत के 5 फीसदी टूटे हुए उसना चावल की कीमत बढ़कर 371 से 377 डॉलर प्रति टन हो गई है, जो पिछले सप्ताह 369 से 375 डॉलर प्रति टन दर्ज की गई थी।
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सफेद चावल (White Rice): 5 फीसदी टूटे हुए सफेद चावल के दाम 368 से 373 डॉलर प्रति टन के स्तर को छू चुके हैं।
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एक साल का उच्च स्तर: व्यापारियों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सप्लाई की चिंताओं के कारण ये दरें पिछले एक वर्ष का सर्वोच्च स्तर हैं।
कम बारिश और कमजोर मानसून से पैदावार पर खतरा
चावल के महंगे होने के पीछे सबसे बड़ा कारण कमजोर मानसून और अगस्त माह में हुई कम बारिश को माना जा रहा है:
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16 फीसदी कम बारिश: अगस्त के दौरान सामान्य से करीब 16% कम बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग द्वारा सितंबर में भी कमजोर बारिश की संभावना के चलते धान (Paddy) के उत्पादन में गिरावट की आशंका जताई जा रही है।
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बुवाई का रकबा घटा: कमजोर मानसून के चलते कई प्रमुख राज्यों में धान की बुवाई प्रभावित हुई है, जिससे कुल बुवाई का रकबा पिछले साल से कम रहा है। कई बिजनेस हाउस और विश्लेषक उत्पादन अनुमानों में कटौती कर रहे हैं।
ग्लोबल डिमांड बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव
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प्रमुख निर्यातक देशों में मजबूती: थाईलैंड और वियतनाम जैसे अन्य बड़े चावल निर्यातक देशों में भी कीमतें ऊंची बनी हुई हैं।
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आयात में बढ़ोतरी: फिलीपींस समेत कई एशियाई व अफ्रीकी देश बड़े पैमाने पर चावल का आयात बढ़ा रहे हैं। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय चावल की मांग और कीमतें दोनों बढ़ी हैं।
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सरकारी स्टॉक राहत की बात: हालांकि, राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार के पास बफर स्टॉक (सरकारी गोदामों) में चावल का पर्याप्त व रिकॉर्ड रिजर्व मौजूद है, जिससे घरेलू बाजार को संतुलित रखने की कोशिश की जा रही है।
आम आदमी के बजट पर असर की आशंका
भारत में चावल दैनिक आहार का प्रमुख हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले हफ्तों में मानसून की स्थिति में सुधार नहीं हुआ और खरीफ फसल का अंतिम उत्पादन अनुमान घटता है, तो घरेलू खुदरा बाजार में भी कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं, जिससे आम परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होना तय है।
