जालंधर (मेजर टाइम्स)। फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में हाल ही में हुए भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन के बाद अब छात्र संगठनों और प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने 19-सूत्रीय मांग पत्र (19-Point Demand Charter) रखा है। इस मांग पत्र में कैंपस की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर शैक्षणिक नीतियों, फीस वृद्धि पर अंकुश और छात्र सलाहकार परिषद (SAC) की आधिकारिक भूमिका जैसे अति-महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
गर्ल्स हॉस्टल की सुरक्षा की मांग
कैंपस सुरक्षा और हॉस्टल नियमों से संबंधित मुख्य बिंदु:
गर्ल्स हॉस्टल में पुरुष कर्मचारियों का प्रवेश वर्जित हो: छात्रों की मांग है कि बिना किसी पूर्व अनुमति और आपातकालीन कारण के किसी भी पुरुष कर्मचारी या व्यक्ति को गर्ल्स हॉस्टल परिसर में प्रवेश न दिया जाए।
कर्मचारियों का वेरिफिकेशन और नशा-मुक्ति: हॉस्टलों में तैनात सभी सुरक्षाकर्मियों व कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन (Verification) और बैकग्राउंड चेक अनिवार्य किया जाए। साथ ही, नशे की हालत में किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध हो।
कृषि (Agriculture) ब्लॉक में सुरक्षा बढ़े: कैंपस के एग्रीकल्चर ब्लॉक समेत संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी निगरानी, उचित रोशनी (Lighting) और आपातकालीन अलार्म सिस्टम स्थापित करने की मांग रखी गई है।
SAC को मिले आधिकारिक मान्यता; FIR और UMC की प्रक्रिया में पारदर्शिता
छात्र सलाहकार परिषद (SAC) की भूमिका: छात्रों ने मांग की है कि छात्र सलाहकार परिषद (Student Advisory Council) को यूनिवर्सिटी की ओर से आधिकारिक मान्यता दी जाए तथा इसके अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट तय किया जाए।
बिना ठोस सबूत के न हो FIR या UMC कार्रवाई: किसी भी छात्र के खिलाफ पर्याप्त सबूत, निष्पक्ष जांच और उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना एफआईआर (FIR) या अनुचित साधनों के प्रयोग (UMC) का केस न दर्ज किया जाए।
UMC जांच में SAC प्रतिनिधि की मौजूदगी: यूएमसी की हर जांच के दौरान कम से कम एक एसएसी (SAC) प्रतिनिधि की उपस्थिति अनिवार्य की जाए और उसे प्रक्रिया पर अपनी औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार मिले।
परीक्षाओं में राहत की मांग
फीस में 5% से अधिक बढ़ोतरी न हो: छात्रों ने मांग की है कि किसी भी निश्चित शैक्षणिक अवधि के दौरान यूनिवर्सिटी फीस में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि न की जाए। इसके साथ ही री-अपीयर (Re-appear) और बैकलॉग परीक्षाओं की फीस कम की जाए।
डिटेंशन फीस व मेडिकल छूट: डिटेंशन फीस को कम किया जाए तथा गंभीर बीमारी या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में छात्रों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत परीक्षा में बैठने की विशेष अनुमति दी जाए।
फ्लेक्सिबल अटेंडेंस और सरकारी छुट्टियां: उपस्थिति नीति को अधिक व्यावहारिक और लचीला बनाने, सरकारी छुट्टियों को यूनिवर्सिटी कैलेंडर में आधिकारिक मान्यता देने तथा शिक्षक की छुट्टी के कारण विद्यार्थियों पर अनावश्यक मेकअप क्लासों का बोझ न डालने की मांग की गई है।
निष्पक्ष जांच, माफी और उचित मुआवजे पर अड़े छात्र
छात्रों ने स्पष्ट किया है कि हालिया घटनाक्रम से प्रभावित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। यदि जांच में यूनिवर्सिटी प्रशासन या किसी अन्य पक्ष की लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए, प्रबंधन औपचारिक रूप से माफी मांगे और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा प्रदान करे।
