Jalandhar News: जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट (JIT) की संपत्तियों की मांग में आई भारी गिरावट और ई-नीलामी की विफलता को लेकर स्थानीय प्रॉपर्टी बाजार और नागरिक संगठनों में भारी रोष देखा जा रहा है। कभी ट्रस्ट की जायदादें खरीदने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगती थीं, लेकिन आज बार-बार ई-नीलामी आयोजित करने के बावजूद खरीदार नहीं मिल रहे हैं। सूर्या एंक्लेव वेलफेयर सोसाइटी के प्रधान एवं वरिष्ठ प्रॉपर्टी कारोबारी राजीव धमीजा ने ट्रस्ट की नीतियों, अत्यधिक रिजर्व प्राइस और प्रशासनिक ढिलाई पर सवाल खड़े करते हुए पंजाब सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।

डेढ़ साल में 5 नीलामियां, बिकीं सिर्फ 16 जायदादें
राजीव धमीजा द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार ट्रस्ट की लगातार पांच ई-नीलामियों के परिणाम बेहद निराशाजनक रहे हैं:
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लगातार असफल नीलामियां: पिछले डेढ़ वर्षों में 20 अगस्त 2025, 4 नवंबर 2025, 7 जनवरी 2026, 23 फरवरी 2026 और 14 अप्रैल 2026 को लगातार पांच ई-नीलामियां आयोजित की गईं।
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200 में से महज 16 की बिक्री: इन नीलामियों में लगभग 200 संपत्तियां बिक्री के लिए रखी गई थीं, जिनमें से केवल 16 ही बिक सकीं।
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नीतिगत खामी का आरोप: धमीजा ने कहा कि यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि समस्या खरीदारों की नीयत में नहीं, बल्कि ट्रस्ट की अव्यावहारिक रिजर्व प्राइस नीति और धरातल से कटी हुई कार्यप्रणाली में है।
“फाइलों में बैठकर नहीं, जमीन पर जाकर बाजार की हकीकत देखे सरकार”
राजीव धमीजा ने ट्रस्ट अधिकारियों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा:
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बिना अध्ययन के रेट बढ़ाना गलत: उन्होंने चिंता जताई कि हर बार नीलामी असफल होने पर अधिकारी जमीनी कारणों की समीक्षा करने के बजाय अगली फाइल में 5 से 7 प्रतिशत तक रिजर्व रेट और बढ़ा देते हैं।
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बाजार की मांग से कटे रेट: संपत्तियों का मूल्य तय करते समय वास्तविक बाजार मांग, लोकेशन, सड़क, सीवरेज, बिजली और व्यावसायिक संभावनाओं की उपेक्षा की जा रही है।
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खराब सर्विस और कागजी अड़चनें: निजी बिल्डरों के विपरीत ट्रस्ट के दफ्तरों में एनडीसी (NDC), रिकॉर्ड एंट्री और रजिस्ट्री के लिए अलॉटियों को महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। पुराने अलॉटियों से 10-12 साल पुराने जमा खर्चों की दोबारा मांग करने से जनता का विश्वास ट्रस्ट से उठ चुका है।
जनहित में रखी गईं प्रमुख मांगें
सूर्या एंक्लेव वेलफेयर सोसाइटी ने पंजाब सरकार और स्थानीय निकाय विभाग के समक्ष निम्नलिखित सुधारों की मांग रखी है:
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40% तक घटे रिजर्व प्राइस: अगली ई-नीलामी से पहले अनबिकी संपत्तियों का ‘इंडिपेंडेंट मार्केट असेसमेंट’ कराया जाए और रिजर्व रेट में कम से कम 40% तक की कटौती की जाए।
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पारदर्शिता और सिंगल विंडो: पिछली पांचों नीलामियों के संपत्ति-वार नतीजे सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही एनडीसी, रिकॉर्ड एंट्री और रजिस्ट्री प्रक्रिया के लिए ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ लागू हो।
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ऑनलाइन जानकारी: बोलीदाताओं के लिए संपत्ति का टाइटल, बकाया, कानूनी स्थिति और विकास कार्य का स्टेटस पहले से ऑनलाइन पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराया जाए।
धमीजा ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट की आर्थिक बदहाली दूर करने का रास्ता जनता पर बेवजह का बोझ डालना नहीं, बल्कि उचित मूल्य और पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए जनता को खरीदार बनाना है।
